शुक्रवार, 15 मार्च 2013

मुहोब्बत की भला इससे बड़ी सौगात क्या होगी जला कर घर खड़ा हूँ मै यहाँ अब रात क्या होगी








ये लीजिये दोस्तों ...कलम के कुछ और एहसास ख़ास आपके लिए |



मुहोब्बत की भला इससे बड़ी सौगात क्या होगी 
जला कर घर खड़ा हूँ मै यहाँ अब रात क्या होगी ||

गुनाहों में गिना जाने लगा दीदार करना अब 
हसीनो के लिए इससे बड़ी खैरात क्या होगी ||

सुबह से शाम तक देखे कई पतझड़ दरीचे में 
गरजते बादलों की रात है बरसात क्या होगी ||

जरा नजरें मिलाकर बोल दे तू दोस्त है मेरा 
बिना जाने तुझे ऐ दोस्त दिल की बात क्या होगी ||

मुझे दुःख है तुम्हारे घर बड़े हैं दिल बिकाऊ हैं 
मुझे दिल से समझने की तेरी औकात क्या होगी ||

जलाते हैं बिना कारण किसी का घर किसी का दर 
सियासत दार चिलायें धरम क्या जात क्या होगी||


पसीना खून का करके पिता ने बेटियां ब्याही 
जहाँ दूल्हे बिकाऊ हों वहां बारात क्या होगी ||

अकेला खेलता शतरंज है जो बंद कमरे में 
उसे शै क्या हराएगी , बिशात-ए-मात क्या होगी ||

     मनोज नौटियाल